Friday, October 30, 2020
Saturday, October 24, 2020
क्या ख़ुदा भी उसका था
मंज़िले भी उसकी थी,
रास्ते भी उसके ही थे..
लोग भी उसके थे,
काफ़िला भी उसका था..
साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी,
फ़िर रास्ते बदलनें का फैसला भी उसी का था..
आज क्यों अकेला हुँ दिल ये सवाल करता है,
लोग तो उसके ही थें, क्या ख़ुदा भी उसका था...
- राजीव "रजत"
Wednesday, October 21, 2020
Tuesday, October 20, 2020
किसी की लाश कफ़न के लिये तरसती है
उदास चिड़िया चमन के लिए तरसती है
किसी की कार में कुते पे रेशमी चादर है
किसी की लाश कफ़न के लिये तरसती है..✍️
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